Tuesday, 21 January 2020

Hindi kahani "मार्श मेलो थ्योरी"



         यह Hindi Kahani एक अध्यापक और उनके कुछ स्टूडेंट्स की है । शिक्षक और स्टूडेंट का अपना एक अलग ही रिश्ता होता है, सारे रिश्तों से अलग और जुदा । एक अनजान व्यक्ति के प्रति पहले ही दिन से अनेक भाव हमारे मन में अपनी जगह सुनिश्चित कर लेते हैं ।

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         हम अपने पूरे जीवन काल में किसी और के साथ सायद ही इतनी जल्दी सहज हो पाते हों किन्तु अध्यापक से तो मिलने से पहले ही हमें ज्ञात होता है कि हमें किस तरह का व्यवहार करना है ।
          एक बार की बात है एक विद्यालय में अध्यापक क्लास रूम में आये आज उनके हाथ में एक बैग भी था सदैव की तरह बच्चों ने उनका अभिवादन किया उन्होंने बैग से पुस्तक निकाली और बच्चों को पढाने लगे ।
        कुछ देर पढाने के बाद उन्होंने बच्चों को पुस्तक बन्द कर के टेबल की दराज में रखने को कहा और अपने बैग से  टॉफियों से भरी एक थैली निकाली और यह कहते हुए की अभी खाना नही, क्लास के सभी बच्चों को एक - एक टॉफी दी यह उस वक्त की सबसे प्रचलित टॉफी थी । फोम की तरह नरम और अत्यंत स्वादिस्ट । सबको टॉफियाँ देने के बाद इससे पहले कि कोई कुछ पूछ पाता उन्होंने एक अजीब बात कही ।

Hindi kahani "मार्श मेलो थ्योरी"

         सुनो, बच्चो ! आपको मैंने जो टॉफियाँ दी हैं सब अपनी - अपनी टेबल पर रख दो मैं दस मिनट के लिए बाहर जा रहा हूँ,  मेरे लौटने तक आपको अपनी टॉफी नही खानी है । मैं ठीक दस मिनट में आ जाऊँगा मेरे वापस आने के बाद आप अपनी - अपनी टॉफियाँ खा सकते हो और यह कहकर वो क्लास रूम से बाहर चले गए ।
        कुछ पल के लिए तो क्लास में सन्नाटा छा गया, हर बच्चा उसके सामने टेबल पर पडी टॉफी को देख रहा था । कुछ देर बाद कोई हँस रहा था तो कोई यह सोच रहा था कि आखिर सर टॉफी खाने को मना कर के क्यों गए तो कुछ बच्चे आपस मे बातें कर रहे थे और कुछ ने तो टॉफी खा ली हर किसी का अपना रियेक्सन था किन्तु हर गुजरते पल के साथ खुद को रोकना मुश्किल हो रहा था ।
         आखिर दस मिनट पूरे हुए और अध्यापक क्लास रूम में आ गए । उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा "मैं लेट तो नही हूँ ठीक दस मिनट में आ गया न" और फिर उन्होंने समीक्षा की और देखा कि कितने बच्चों के टेबल में टॉफीयाँ हैं । पूरे क्लास रूम में सिर्फ सात बच्चे थे, जिनकी टॉफियाँ ज्यूँ की त्यूँ थी,जबकि बाकी सभी बच्चे अपनी - अपनी टॉफी खाकर उसके रंग और स्वाद आदि पर टिप्पणी कर रहे थे ।


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           टीचर ने अपनी डायरी निकाली और उन सात बच्चों के नाम और उनसे सम्बंधित  कुछ और जानकारी को अपनी डायरी में दर्ज कर दिया और साथ ही उन सभी बच्चों के नाम और जानकारी भी उसी डायरी में अलग से दर्ज कर दी जिन्होंने पहले ही अपनी टॉफी खा ली थी । जानकारी दर्ज करने के बाद उन्होंने फिर से पढाना शुरू कर दिया ।
          क्या आप जानते हैं ये शिक्षक कौन थे ? इस शिक्षक का नाम प्रोफेसर वाल्टर मिसेल था । प्रोफेसर वाल्टर मिसेल ने यह सब एक रिसर्च करने के मकसद से किया था । समय बीतता गया और बितते समय के साथ नए - नए बच्चे स्कूल में आये और कुछ समय पश्चात ओ क्लास पास आउट हो के स्कूल से चली गयी ।
         समय तो नियमित अपनी गति से चलता ही रहता है और बीतते समय के साथ परिस्थितियाँ भी बदल जाती हैं उस क्लास के पास आउट होने के कुछ वर्षों बाद प्रोफेसर वाल्टर ने अपनी वही डायरी निकाली और जिन्होंने टॉफियाँ नही खाई थी उन सात बच्चों के नाम निकाल कर अलग से एक पेपर पर लिखा और बाकी के बच्चों का नाम एक अलग पेपर पर लिखा फिर उन्होंने उनके बारे में शोध शुरू कर दिया ।
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          काफी खोजबीन और जाँच पडताल के एक लंबे संघर्ष के बाद, उन्हें यह पता चला कि जिन्होंने टॉफी नही खाई थी उन सातों बच्चों ने अपने जीवन में कई सफलताओं को हासिल किया है और आज भी वो अपने - अपने फील्ड में  काफी सफल हैं ।
         प्रोफेसर वाल्टर ने साथ - साथ बाकी वर्ग के छात्रों की भी समीक्षा की थी तो उन्हें यह पता चला कि जिन बच्चों ने टॉफियाँ खा ली थी उनमें से अधिकतर एक आम जीवन जी रहे थे, जबकी कुछ लोग तो ऐसे भी थे जिन्हें सख्त आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों का सामना करना पड रहा था ।
         अपने सभी प्रयास और शोध को जब प्रोफेसर वाल्टर ने पब्लिक किया तो उसका परिणाम प्रोफेसर वाल्टर ने एक वाक्य में निकाला और वह यह था ।

"जो आदमी दस मिनट तक धैर्य नही रख सकता, वह जीवन में कभी आगे नही बढ सकता है” ।

          प्रोफेसर वाल्टर के इस शोध को दुनिया भर में शोहरत मिली और इसका नाम "मार्श मेलो थ्योरी" रखा गया  क्योंकि प्रोफेसर वाल्टर ने क्लास के सभी बच्चों को जो टॉफियाँ  दी थी उसका नाम "मार्श मेलो" था ।
        इस थ्योरी के अनुसार दुनिया के सबसे सफल लोगों में कई गुणों के साथ - साथ एक गुण 'धैर्य' भी पाया जाता है, क्योंकि यह खूबी इन्सान के बर्दाश्त करने की ताकत को बढाती है, जिसकी बदौलत इन्सान किसी भी कठिन से कठिन परिस्थितियों में निराश नही होता है और वह एक असाधारण व्यक्तित्व बन कर उभरता है।
इसलिये मनुष्य को हमेशा धैर्य का परिचय देना चाहिए किसी भी परिस्थिति में धैर्य नही खोना चाहिए धैर्य ही जीवन का सार है ।
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