Saturday, 4 January 2020

Panchtantr ki kahaniya "कौवे और दुष्ट सर्प"

             Panchtantr ki kahaniya

                     "कौवे और दुष्ट सर्प"


            एक जंगल में एक बहुत पुराना बरगद का पेड था । उस पेड पर घोंसला बनाकर एक कौआ और कव्वी का जोडा रहता था । उसी पेड के खोखले तने में कहीं से आकर एक दुष्ट सर्प रहने लगा । हर वर्ष मौसम आने पर कव्वी घोंसले में अंडे देती और दुष्ट सर्प मौका पाकर उनके घोंसले में जाकर अंडे खा जाता ।

Panchtantr ki kahaniya "दुष्ट सर्प और कौवे", hindi kahaniya
Panchtantr ki kahaniya

            एक बार जब कौआ व कव्वी जल्दी भोजन पाकर शीघ्र ही लौट आए तो उन्होंने उस दुष्ट सर्प को अपने घोंसले में रखे अंडों पर झपटते देखा । अंडे खाकर सर्प चला गया कौए ने कव्वी को ढाडस बंधाया 'प्रिये, हिम्मत रखो । अब हमें शत्रु का पता चल गया है । कुछ उपाय भी सोच लेंगे' ।

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             कौए ने काफी सोचा, विचारा और पहले वाले घोंसले को छोड उससे काफी ऊपर टहनी पर घोंसला बनाया और कव्वी से कहा 'यहाँ हमारे अंडे सुरक्षित रहेंगे । हमारा घोंसला पेड की चोटी पर है और ऊपर आसमान में चील मंडराती रहती है । चील साँप की बैरी है । दुष्ट सर्प यहाँ तक आने का साहस नही कर पाएगा' ।
           कौवे की बात मानकर कौव्वी ने नए घोंसले में अंडे दिए जिसमें अंडे सुरक्षित रहे और उनमें से बच्चे भी निकल आए। उधर सर्प उनका घोंसला खाली देखकर यह समझा कि उसके डर से कौआ कव्वी शायद वहाँ से चले गए हैं पर दुष्ट सर्प टोह लेता रहता था । उसने देखा कि कौआ, कव्वी उसी पेड से उडते हैं और लौटते भी वहीं हैं । उसे यह समझते देर नही लगी कि उन्होंने नया घोंसला उसी पेड पर ऊपर बना रखा है ।

Panchtantr ki kahaniya "दुष्ट सर्प और कौवे", hindi kahaniya
Panchyantr ki kahaniya

             एक दिन सर्प खोह से निकला और उसने कौओं का नया घोंसला खोज लिया । घोंसले में कौआ दंपती के तीन नवजात शिशु थे । दुष्ट सर्प उन्हें एक - एक करके घपाघप निगल गया और अपने खोह में लौटकर डकारें लेने लगा । कौआ व कव्वी लौटे तो घोंसला खाली पाकर सन्न रह गए । घोंसले में हुई टूट - फूट व नन्हें कौओं के कोमल पंख बिखरे देखकर वह सारा माजरा समझ गए । कव्वी की छाती तो दुख से फटने लगी । कव्वी बिलख उठी 'तो क्या हर वर्ष मेरे बच्चे साँप का भोजन बनते रहेंगे' ?

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            कौआ बोला 'नही ! यह माना कि हमारे सामने विकट समस्या है पर यहाँ से भागना ही उसका हल नही है । विपत्ति के समय ही मित्र काम आते हैं । हमें लोमडी मित्र से सलाह लेनी चाहिए' ।
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            दोनों तुरन्त ही लोमडी के पास गए । लोमडी ने अपने मित्रों की दुख भरी कहानी सुनी । उसने कौआ तथा कव्वी के आँसू पोंछे । लोमडी ने काफी सोचने के बाद कहा 'मित्रो ! तुम्हें वह पेड छोडकर जाने की जरुरत नही है । मेरे दिमाग में एक तरकीब है, जिससे उस दुष्टसर्प से छुटकारा पाया जा सकता है' । लोमडी ने अपने चतुर दिमाग में आई तरकीब बताई । लोमडी की तरकीब सुनकर कौआ, कव्वी खुशी से उछल पडे उन्होंने लोमडी को धन्यवाद दिया और अपने घर लौट आये ।
          अगले ही दिन योजना अमल में लानी थी । उसी वन में बहुत बडा सरोवर था । उसमें कमल और नरगिस के फूल खिले रहते थे। हर मंगलवार को उस प्रदेश की राजकुमारी अपनी सहेलियों के साथ वहाँ जलक्रीडा करने आती थी । उनके साथ अंगरक्षक तथा सैनिक भी आते थे ।
        इस बार राजकुमारी आई और सरोवर में स्नान करने जल में उतरी तो योजना के अनुसार कौआ उडता हुआ वहाँ आया । उसने सरोवर तट पर राजकुमारी तथा उसकी सहेलियों द्वारा उतारकर रखे गए कपडों व आभूषणों पर नजर डाली। कपडे के ऊपर राजकुमारी का प्रिय हीरे व मोतियों का विलक्षण हार रखा था कौव्वी ने राजकुमारी तथा सहेलियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए ‘काँव - काँव’ का शोर मचाया ।


        जब सबकी नजर उसकी ओर घूमी तो कौआ राजकुमारी का हार चोंच में दबाकर ऊपर उड गया । सभी सहेलियाँ चीखी 'देखो, देखो ! वह राजकुमारी का हार उठाकर ले जा रहा है' । सैनिकों ने ऊपर देखा तो सचमुच एक कौआ हार लेकर धीरे - धीरे उडता जा रहा था। सैनिक उसी दिशा में दौडने लगे। कौआ सैनिकों को अपने पीछे लगाकर धीरे - धीरे उडता हुआ उसी पेड की ओर ले आया ।

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           जब सैनिक कुछ ही दूर रह गए तो कौए ने राजकुमारी का हार इस प्रकार गिराया कि वह साँप वाले खोह के भीतर जा गिरा । सैनिक दौडकर खोह के पास पहुँचे । उनके सरदार ने खोह के भीतर झाँका । उसने वहाँ हार और उसके पास में ही एक काले सर्प को कुंंडली मारे देखा ।
           वह चिल्लाया 'पीछे हटो ! अंदर एक साँप है' । सरदार ने खोह के भीतर भाला मारा। सर्प घायल हुआ और फुफकारता हुआ बाहर निकला । जैसे ही वह बाहर आया, सैनिकों ने भालों से उसके टुकडे - टुकडे कर डाले ।


शिक्षा - सूझ बूझ का उपयोग कर हम बडी से बडी ताकत और दुश्मन को हरा सकते हैं, बुद्धि का प्रयोग करके हर संकट का हल निकाला जा सकता है। इसलिए सदैव धैर्य एवं सूझ बूझ से ही कार्य करने चाहिये ।
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